भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार के गैर-डिजिटाइज़्ड अभिलेखों की आपूर्ति हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP)

राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) अपने अभिलेख संग्रह तक पहुँच को बेहतर और सरल बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहा है। अभिलेखों तक पहुँच की वर्तमान नीति की हाल ही में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए समीक्षा की गई। यह देखा गया कि विश्वभर के प्रमुख अभिलेखागारों द्वारा अभिलेखों एवं संग्रहों के डिजिटलीकरण ने लोगों के अभिलेखों तक पहुँचने के तरीके को बदल दिया है।

NAI का ऑनलाइन अभिगम पोर्टल – अभिलेख-पटल (https://www.abhilekh-patal.in/jspui/) – 11 मार्च 2015 को प्रारंभ किया गया था और तब से यह अभिलेख उपयोगकर्ताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गया है। वर्तमान में इसके लगभग 30,000 पंजीकृत उपयोगकर्ता 200 से अधिक देशों से हैं।

सूचना के लोकतंत्रीकरण के उद्देश्य से, NAI के अभिलेख संग्रह तक आसान पहुँच के लिए एक रोडमैप 1 अक्टूबर 2024 को NAI के दौरे के दौरान माननीय संस्कृति मंत्री (HCM) को प्रस्तुत किया गया। इसके अनुरूप, अभिगम को सरल बनाने हेतु लोक अभिलेख नियम, 1997 में कुछ विशेष संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है, जिन्हें विचारार्थ संस्कृति मंत्रालय के सचिव को भेजा गया है।

इसके अतिरिक्त, अभिलेखों को क्षति से बचाने और सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए, गैर-डिजिटाइज़्ड अभिलेखों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने हेतु निम्नलिखित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित की गई है:

गैर-डिजिटाइज़्ड अभिलेखों तक पहुँच की वर्तमान प्रक्रिया

11. पंजीकरण प्रक्रिया:

11.1. उपयोगकर्ता/शोधार्थी को पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसमें फॉर्म-8 अनिवार्य है, जैसा कि लोक अभिलेख नियम, 1997 के अंतर्गत [नियम 10 के उप-नियम (2)] में प्रावधानित है। इसके साथ निम्नलिखित आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने होते हैं:

  • भारतीय शोधार्थियों के लिए:
    (परिचय पत्र, पहचान पत्र की प्रति)
  • विदेशी शोधार्थियों के लिए:
    (परिचय पत्र, पासपोर्ट की प्रति एवं संबंधित दूतावास से कूटनीतिक पत्र)
  • स्वतंत्र उपयोगकर्ताओं के लिए:
    (वैध पहचान पत्र का प्रस्तुतिकरण)

12. संदर्भ सामग्री का परामर्श

2.1. ऑनलाइन संदर्भ सामग्री का परामर्श:
अभिलेख-पटल (www.abhilekh-patal.in) पर सूचकांक (Indices) एवं स्थानांतरण सूचियाँ (Transfer Lists) उपलब्ध हैं।

2.2. गैर-डिजिटाइज़्ड संदर्भ सामग्री या सत्यापन की स्थिति में:
ऐसी स्थिति में शोध कक्ष (Research Room - RR) में भौतिक रूप से संदर्भ सामग्री का परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।

 

अभिलेख मांग (Requisition) प्रक्रिया:

3.1. एक समय में, एक उपयोगकर्ता/शोधार्थी प्रतिदिन अधिकतम 15 रिक्विज़िशन स्लिप प्रस्तुत कर सकता है।

3.2. उपयोगकर्ताओं द्वारा गैर-डिजिटाइज़्ड अभिलेखों के लिए अनुरोध विधिवत भरे गए प्रपत्र (प्रोफार्मा) में प्राप्त किया जाता है, जिसे शोध कक्ष (Research Room - RR) संबंधित भंडार (Repositories) को अग्रेषित करता है। भंडार से प्राप्त अभिलेख उपयोगकर्ताओं को परामर्श हेतु उपलब्ध कराए जाते हैं।

3.3. शोध कक्ष में फाइलों के परामर्श की समयावधि SOP के अनुसार सात (07) दिन है। यदि उपयोगकर्ता/शोधार्थी निर्धारित समयावधि में फाइलों का उपयोग नहीं करता है, तो शोध कक्ष (RR) उन्हें सात (07) दिनों के भीतर संबंधित भंडार को वापस कर देता है।

प्रतिलिपि सेवा (Reprography Services):

अभिलेखों की फोटो लेना निःशुल्क है। उपयोगकर्ता निर्धारित शुल्क के अनुसार फोटोकॉपी/स्कैनिंग सेवाओं का भी लाभ उठा सकते हैं।

अभिलेख वापसी प्रक्रिया (Record Returning Process):

अभिलेखों को परामर्श पूर्ण होने या फोटोकॉपी एवं स्कैनिंग प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद संबंधित भंडार को वापस कर दिया जाता है।

गैर-डिजिटाइज़्ड अभिलेखों तक पहुँच की भविष्य की प्रक्रिया:

पंजीकरण प्रक्रिया:

गैर-डिजिटाइज़्ड फाइलों के लिए पंजीकरण एवं मांग प्रक्रिया यथावत रहेगी। डिजिटल प्रारूप में फाइल उपलब्ध कराने में निम्नलिखित परिवर्तन प्रस्तावित हैं:

गैर-डिजिटाइज़्ड अभिलेख:

a. उपयोगकर्ताओं को प्रतिदिन निर्धारित प्रपत्र/रिक्विज़िशन स्लिप के माध्यम से शोध कक्ष (RR) के ईमेल (researchroomnai1@gmail.com) पर 15 अनुरोध भेजने की अनुमति होगी।

b. शोध कक्ष (RR) इन अनुरोधों को संबंधित भंडार को अग्रेषित करेगा।

c. पृष्ठांकन (Pagination), बारकोडिंग तथा डैशबोर्ड एंट्री के बाद, प्रत्येक भंडार ‘A’ एवं ‘B’ श्रेणी की फाइलों को शोध कक्ष के निकट स्थित CBSL स्कैनर (जिसे आगे “रिसर्च रूम स्कैनर” कहा जाएगा) को भेजेगा।

d. इसके पश्चात CBSL इन फाइलों का डिजिटलीकरण करेगा, TIFF प्रारूप में उपयोगकर्ता/शोधार्थी के नामानुसार फ़ोल्डर बनाएगा तथा उन्हें तुरंत पेन ड्राइव के माध्यम से शोध कक्ष (RR) को उपलब्ध कराएगा। QC के बाद ये फाइलें डैशबोर्ड के माध्यम से संबंधित भंडार को वापस कर दी जाएंगी। TIFF छवियों को सामान्य प्रक्रिया के अनुसार JPEG एवं PDFA प्रारूप में भी परिवर्तित किया जाएगा।

e. ‘C’ श्रेणी की फाइलों के संबंध में, भंडार पृष्ठांकन, बारकोडिंग एवं डैशबोर्ड एंट्री के बाद इन्हें मरम्मत विक्रेता (Repair Vendor) को भेजेगा। मरम्मत के बाद विक्रेता इन्हें रिसर्च रूम स्कैनर को भेजेगा। तत्पश्चात TIFF फाइलें नामानुसार फ़ोल्डर में पेन ड्राइव में संग्रहीत कर तुरंत RR को उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उपयोगकर्ता/शोधार्थी को सूचित किया जा सके।

f. हाइब्रिड श्रेणी की फाइलों के लिए प्रत्येक भंडार एक अलग भौतिक रजिस्टर रखता है। उपयोगकर्ता/शोधार्थी द्वारा मांगी गई हाइब्रिड फाइलों को पृष्ठांकन के बाद आंशिक मरम्मत हेतु भेजा जाएगा। आंशिक मरम्मत के बाद संबंधित भंडार इन्हें ‘B’ श्रेणी की फाइल मानते हुए बारकोडिंग एवं डैशबोर्ड एंट्री के पश्चात रिसर्च रूम स्कैनर को स्कैनिंग हेतु भेजेगा। इसके बाद CBSL इन फाइलों का डिजिटलीकरण कर TIFF फ़ोल्डर (उपयोगकर्ता के नाम अनुसार) बनाकर तुरंत RR को उपलब्ध कराएगा।

g. CBSL से प्राप्त उपयोगकर्ता-वार डिजिटाइज़्ड फाइलें जब शोध कक्ष (RR) में प्राप्त होंगी, तब RR उपयोगकर्ता को ईमेल के माध्यम से सूचित करेगा कि वह 03 कार्य दिवसों के भीतर RR आकर “रीड-ओनली” प्रारूप में डिजिटल छवियों का अवलोकन करे। यदि उपयोगकर्ता 10 दिनों के भीतर नहीं आता है, तो ये फाइलें RR के कंप्यूटर से हटा दी जाएंगी।

h. यदि उपयोगकर्ता/शोधार्थी को प्रिंटआउट की आवश्यकता होती है, तो उन्हें वर्तमान प्रथा के अनुसार मुहरयुक्त प्रतियां, निर्धारित दरों पर, प्रतिलिपि अनुभाग (Reprography Section) द्वारा प्रदान की जाएंगी।

i. यदि डिजिटल अभिलेखों के सुचारु उपयोग हेतु किसी प्रकार का मार्गदर्शन या सहायता आवश्यक हो, तो शोधार्थी RR से संपर्क कर सकते हैं। RR इस अनुरोध को संबंधित अधिकारियों (डिजिटलीकरण कार्य देख रहे) को अग्रेषित करेगा।

j. यद्यपि प्राथमिकता शोध कक्ष कार्य को दी जाएगी, परंतु यदि निर्दिष्ट स्कैनर में अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो, तो उसका उपयोग नियमित स्कैनिंग कार्य के लिए भी किया जाएगा ताकि उत्पादन अधिकतम बना रहे।

k. यदि किसी उपयोगकर्ता/शोधार्थी द्वारा मांगी गई फाइल पहले से स्कैन की जा चुकी है, लेकिन अभी अपलोड नहीं हुई है, तो संबंधित भंडार डिजिटलीकरण विक्रेता को सूचित करेगा और TIFF छवियों को शोध कक्ष भेजने की व्यवस्था करेगा, ताकि शोधार्थी उनका अवलोकन कर सके।

विशेष परिस्थितियाँ (Exceptional Cases):

कुछ समय-सीमित विशेष मामलों जैसे—VVIP मामले, PMO मामले, अभिलेख सृजन एजेंसियों के अनुरोध, दिव्यांग व्यक्तियों एवं विदेशी उपयोगकर्ता/शोधार्थी के मामलों में—अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तत्काल की जाएगी। इसके लिए भंडार प्रभारी (Repositories I/Cs) को समय पर अभिलेख उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया जाएगा।

इस पर अभिलेख महानिदेशक (Director General of Archives) की स्वीकृति प्राप्त है।